Sunday, March 18, 2012 8:08:04 AM
Sunday, March 18, 2012 5:22:03 AM
एक चेहरा था ,दो आखें थीं ,हम भूल पुरानी कर बैठे .
एक किस्सा जी कर खुद को ही, हम एक कहानी कर बैठे ...
हम तो अल्हड-अलबेले थे ,खुद जैसे निपट अकेले थे ,
मन नहीं रमा तो नहीं रमा ,जग में कितने ही मेले थे ,
पर जिस दिन प्यास बंधी तट पर ,पनघट इस घट में अटक गया .
एक इंगित ने ऐसा मोड़ा,जीवन का रथ, पथ भटक गया ,
जिस "पागलपन" को करने में ज्ञानी-ध्यानी घबराते है ,
वो पागलपन जी कर खुद को ,हम ज्ञानी-ध्यानी कर बैठे.
एक चेहरा था ,दो आखें थीं ,हम भूल पुरानी कर बैठे .
एक किस्सा जी कर खुद को ही, हम एक कहानी कर बैठे .
परिचित-गुरुजन-परिजन रोये,दुनिया ने कितना समझाया
पर रोग खुदाई था अपना ,कोई उपचार ना चल पाया ,
एक नाम हुआ सारी दुनिया ,काबा-काशी एक गली हुई,
ये शेरो-सुखन ये वाह-वाह , आहें हैं तब की पली हुई
वो प्यास जगी अन्तरमन में ,एक घूंट तृप्ति को तरस गए ,
अब यही प्यास दे कर जग को ,हम पानी-पानी कर बैठे .
एक चेहरा था ,दो आखें थीं ,हम भूल पुरानी कर बैठे .
एक किस्सा जी कर खुद को ही, हम एक कहानी कर बैठे .
क्या मिला और क्या छूट गया , ये गुना-भाग हम क्या जाने ,
हम खुद में जल कर निखरे हैं ,कुछ और आग हूँ क्या जाने ,
सांसों का मोल नहीं होता ,कोई क्या हम को लौटाए ,
जो सीस काट कर हाथ धरे , वो साथ हमारे आ जाए ,
कहते हैं लोग हमें "पागल" ,कहते हैं नादानी की है ,
हैं सफल "सयाना" जो जग में , ऐसी नादानी कर बैठे
एक चेहरा था ,दो आखें थीं ,हम भूल पुरानी कर बैठे .
एक किस्सा जी कर खुद को ही, हम एक कहानी कर बैठे .
एक किस्सा जी कर खुद को ही, हम एक कहानी कर बैठे ...
हम तो अल्हड-अलबेले थे ,खुद जैसे निपट अकेले थे ,
मन नहीं रमा तो नहीं रमा ,जग में कितने ही मेले थे ,
पर जिस दिन प्यास बंधी तट पर ,पनघट इस घट में अटक गया .
एक इंगित ने ऐसा मोड़ा,जीवन का रथ, पथ भटक गया ,
जिस "पागलपन" को करने में ज्ञानी-ध्यानी घबराते है ,
वो पागलपन जी कर खुद को ,हम ज्ञानी-ध्यानी कर बैठे.
एक चेहरा था ,दो आखें थीं ,हम भूल पुरानी कर बैठे .
एक किस्सा जी कर खुद को ही, हम एक कहानी कर बैठे .
परिचित-गुरुजन-परिजन रोये,दुनिया ने कितना समझाया
पर रोग खुदाई था अपना ,कोई उपचार ना चल पाया ,
एक नाम हुआ सारी दुनिया ,काबा-काशी एक गली हुई,
ये शेरो-सुखन ये वाह-वाह , आहें हैं तब की पली हुई
वो प्यास जगी अन्तरमन में ,एक घूंट तृप्ति को तरस गए ,
अब यही प्यास दे कर जग को ,हम पानी-पानी कर बैठे .
एक चेहरा था ,दो आखें थीं ,हम भूल पुरानी कर बैठे .
एक किस्सा जी कर खुद को ही, हम एक कहानी कर बैठे .
क्या मिला और क्या छूट गया , ये गुना-भाग हम क्या जाने ,
हम खुद में जल कर निखरे हैं ,कुछ और आग हूँ क्या जाने ,
सांसों का मोल नहीं होता ,कोई क्या हम को लौटाए ,
जो सीस काट कर हाथ धरे , वो साथ हमारे आ जाए ,
कहते हैं लोग हमें "पागल" ,कहते हैं नादानी की है ,
हैं सफल "सयाना" जो जग में , ऐसी नादानी कर बैठे
एक चेहरा था ,दो आखें थीं ,हम भूल पुरानी कर बैठे .
एक किस्सा जी कर खुद को ही, हम एक कहानी कर बैठे .
Sunday, March 18, 2012 5:19:27 AM
उसी की तरहा मुझे सारा ज़माना चाहे ,
वो मेरा होने से ज्यादा मुझे पाना चाहे ?.
मेरी पलकों से फिसल जाता है चेहरा तेरा ,
ये मुसाफिर तो कोई और ठिकाना चाहे .
एक बनफूल था इस शहर में वो भी ना रहा,
कोई अब किस के लिए लौट के आना चाहे .
ज़िन्दगी हसरतों के साज़ पे सहमा-सहमा,
वो तराना है जिसे दिल नहीं गाना चाहे .
हम अपने आप से कुछ इस तरह हुए रुखसत,
साँस को छोड़ दिया जिस तरफ जाना चाहे .
वो मेरा होने से ज्यादा मुझे पाना चाहे ?.
मेरी पलकों से फिसल जाता है चेहरा तेरा ,
ये मुसाफिर तो कोई और ठिकाना चाहे .
एक बनफूल था इस शहर में वो भी ना रहा,
कोई अब किस के लिए लौट के आना चाहे .
ज़िन्दगी हसरतों के साज़ पे सहमा-सहमा,
वो तराना है जिसे दिल नहीं गाना चाहे .
हम अपने आप से कुछ इस तरह हुए रुखसत,
साँस को छोड़ दिया जिस तरफ जाना चाहे .
Sunday, March 18, 2012 5:17:50 AM
तुम कहो और मैं चुप रहूँ
ऐसा तो नही होता है।
प्रथम रात्रि ही मांगो मुझसे मेरे अक्षत होने का प्रणाम
खुद जीवन पर्यन्त तुम अप्रमाणित रहो
ऐसा तो नही होता है
मैं लगाऊँ सिन्दुर पहनू मंगल सूत्र
सुहाग के चिन्ह और तुम आजीवन
अचिन्हित रह जाओ ऐसा तो नही होता है
मेरी सभा में स्वजन मुझे तार-तार कर दे
और मैं कृष्ण से विलाप करु ऐसा तो नही होता है
मैं तुम्हारे लिये करु आजीवन अपने आंखों में अंधेरा
गंधारी सी और तुम मेरे सतित्व को
परखने मुझे अग्नि में चलवाओ राम सा ऐसा तो नही होता है
मैं स्वःर्स्फुत हूं ना कि अहिल्या सी जड़ जो तुम मुझें पैरों से
छु के चैतन्य करो ऐसा तो नही होता है।
तुम अकेले जाओ जंग के मोर्चे में इतिहास में अमर होने के लिए
और मैं तुम्हारी याद में शोक गीत गाऊ ऐसा तो नही होता है।
मैं स्त्रीयोचित लज्जा के नाम पे गड़ी-गड़ी जाऊ
तुम पुरुषोचित विरता पे दम भरो ऐसा तो नही होता है।
संख्या और शक्ति में मैं तुम्हारे आधे के बराबर
और तुम मेरा संपुर्ण अस्तित्व ही नकारो
ऐसा तो नही होता।
तुम कहो और मैं चुप रहूँ
ऐसा तो नही होता है।
Saturday, March 17, 2012 2:36:26 PM
गुनगुनाते हुए आँचल की हवा दे मुझको !
उंगलियाँ फैर बालों में और सुला दे मुझको !
याद कर के मुझे तकलीफ ही होती होगी
एक किस्सा हूँ पुराना-सा, भुला दे मुझको !
...
डूबते- डूबते आवाज़ तेरी सुन जाऊं
आखरी बार तू साहिल से सदा दे मुझको !
मैं तेरे हिज्र में चुप-चाप ना मर जाऊं कहीं
मैं हूँ सकते में, कभी आ के रुला दे मुझको !
देख मैं हो गया बदनाम किताबों की तरह
मेरी ताशहीर ना कर अब तू जला दे मुझको !!
उंगलियाँ फैर बालों में और सुला दे मुझको !
याद कर के मुझे तकलीफ ही होती होगी
एक किस्सा हूँ पुराना-सा, भुला दे मुझको !
...
डूबते- डूबते आवाज़ तेरी सुन जाऊं
आखरी बार तू साहिल से सदा दे मुझको !
मैं तेरे हिज्र में चुप-चाप ना मर जाऊं कहीं
मैं हूँ सकते में, कभी आ के रुला दे मुझको !
देख मैं हो गया बदनाम किताबों की तरह
मेरी ताशहीर ना कर अब तू जला दे मुझको !!
Saturday, March 17, 2012 2:28:10 PM
"शाम अगर जल्दी ढल जाए तबियत घबराती है,
एक समय के बाद तुम्हारी आदत चिल्लाती है ,
जो बेचैनी सिर्फ तुम्हारे होने पर होती थी
हम दोनों जब अलग हो गए क्यूँ आती-जाती है...?"
एक समय के बाद तुम्हारी आदत चिल्लाती है ,
जो बेचैनी सिर्फ तुम्हारे होने पर होती थी
हम दोनों जब अलग हो गए क्यूँ आती-जाती है...?"
Saturday, March 17, 2012 2:27:04 PM
Koi to jaa ke bataye use ki jeetey hain
Lafz ke sare kabiley teri duaoon se .......
"तुमने तो ठुकरा ही दिया है,दुनिया से भी दूर हुए
अपनी अना के सारे शीशे, आखिर चकनाचूर हुए ,
हमने जिन पर गज़लें सोचीं उनको चाहा लोगों ने
हम कितने बदनाम हुए थे वो कितने मशहूर हुए.........."[मोहसिन नकवी].
Lafz ke sare kabiley teri duaoon se .......
"तुमने तो ठुकरा ही दिया है,दुनिया से भी दूर हुए
अपनी अना के सारे शीशे, आखिर चकनाचूर हुए ,
हमने जिन पर गज़लें सोचीं उनको चाहा लोगों ने
हम कितने बदनाम हुए थे वो कितने मशहूर हुए.........."[मोहसिन नकवी].
Saturday, March 17, 2012 2:26:37 PM
Koi to jaa ke bataye use ki jeetey hain
Lafz ke sare kabiley teri duaoon se .......
"तुमने तो ठुकरा ही दिया है,दुनिया से भी दूर हुए
अपनी अना के सारे शीशे, आखिर चकनाचूर हुए ,
हमने जिन पर गज़लें सोचीं उनको चाहा लोगों ने
हम कितने बदनाम हुए थे वो कितने मशहूर हुए.........."[मोहसिन नकवी].
Lafz ke sare kabiley teri duaoon se .......
"तुमने तो ठुकरा ही दिया है,दुनिया से भी दूर हुए
अपनी अना के सारे शीशे, आखिर चकनाचूर हुए ,
हमने जिन पर गज़लें सोचीं उनको चाहा लोगों ने
हम कितने बदनाम हुए थे वो कितने मशहूर हुए.........."[मोहसिन नकवी].
Saturday, March 17, 2012 1:18:01 PM
मैं अकेला चला था, अकेला ही हूँ,
राह कांटो भरी है, मैं ठहरा ही हूँ!
सोचता हूँ कदम ये बढ़ाऊ ही क्यूँ,
बाते ही ना सुनूँ, जैसे बहरा ही हूँ !
रात के इस अँधेरे से, डरना ही क्या?
दीखता कुछ है नही,एक चेहरा ही हूँ ,
पैसे की भूख में लोग अंधे है यूँ,
देखते ही नहीं एक सेहरा ही हूँ
जो कभी कह दू की जिंदगी बोझ हैं
लोग हैरान हैं की मैं गहरा भी हूँ!!!
राह कांटो भरी है, मैं ठहरा ही हूँ!
सोचता हूँ कदम ये बढ़ाऊ ही क्यूँ,
बाते ही ना सुनूँ, जैसे बहरा ही हूँ !
रात के इस अँधेरे से, डरना ही क्या?
दीखता कुछ है नही,एक चेहरा ही हूँ ,
पैसे की भूख में लोग अंधे है यूँ,
देखते ही नहीं एक सेहरा ही हूँ
जो कभी कह दू की जिंदगी बोझ हैं
लोग हैरान हैं की मैं गहरा भी हूँ!!!
Saturday, March 17, 2012 1:17:12 PM
राह काँटों भरी है तो कट जाएगी,
तू ना गम कर सुबह कल को फिर आयेगी |
मैं यूँ ही रोज कहता हूँ गम है बहुत,
फिक्र ना कर मजे में गुज़र जाएगी |
लोग सागर को कहते हैं क्या-क्या नहीं,
पर ना हस्ती कभी उसकी मिट पायेगी |
सोचता हूँ की ख्वाबो को पूरा करूँ
पर हकीकत से दुनिया ये जल जाएगी |
रोज़ कहता हूँ हैं,ज़िन्दगी एक सजा,
कुछ तो करता रहूँ ये भी कट जाएगी...||
तू ना गम कर सुबह कल को फिर आयेगी |
मैं यूँ ही रोज कहता हूँ गम है बहुत,
फिक्र ना कर मजे में गुज़र जाएगी |
लोग सागर को कहते हैं क्या-क्या नहीं,
पर ना हस्ती कभी उसकी मिट पायेगी |
सोचता हूँ की ख्वाबो को पूरा करूँ
पर हकीकत से दुनिया ये जल जाएगी |
रोज़ कहता हूँ हैं,ज़िन्दगी एक सजा,
कुछ तो करता रहूँ ये भी कट जाएगी...||
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