zindagi
Wednesday, October 10, 2007 8:44:05 AM
ज़िन्दगी गुजरने में देर कितनी लगती है
आदमी बदलने में देर कितनी लगती है!
ज़िन्दगी की रहो पं उदास क्यूँ घूमती हो
ज़िन्दगी बदलने में देर कितनी लगती है!!
वक़्त हो जुदाई का या मिलान का
आंख के बरेसना में देर कितनी लगती है !
तुमसे जो मुहब्बत है साथ-२ चलते है
रास्ता बदलने में देर लितनी लगती है!!
हाथ की रेखा पे वोह नाज़ करतें हैं
किस्मत बदेलेने में देर कितनी लगती है !!!
आप सा कोई हसीं ज़िन्दगी में आ जाए" राणा"
ज़िन्दगी लुटाने में देर कितनी लगती हैं!!!
*@Aryan*













Aaryan RajputAaryanRajput # Wednesday, October 10, 2007 8:44:41 AM
Prabha ChoudharyPrabhachaudhary # Monday, November 12, 2007 6:49:21 AM