एक संबाद दिल से
Saturday, January 9, 2010 4:15:31 PM
जूझने का मेरा इरादा न था,
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,
रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,
यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई .......अटल बिहारी वाजपेयी
जिंदगी के फलसफे भी कुछ अजीब होती है, कभी जिंदगी महज एक लम्हा-लम्हा को तरसती है... तो कभी लम्हों के एहसास को समझने में जिन्दगी बीत जाती है।पर ये भी सच है की जिंदगी में मिश्रित भावनाओं के रंग और सम्बेदना कसौटी न हो तो ये बेमानी है।
अनुभवहीनता परिस्थितियों से अक्सर भागने के लिए उसकाती है।ये सच है की परिस्थितियों और परिस्थति बस उत्पन्न अब्सरों को समझना थोरा मुस्किल है पर अब्सरों के लाभ का मूल्यांकन करे तो इनसे संघर्ष ही बेहतर बिकल्प है।
ऐसे ही जिंदगी के कुछ फलसफे लिए मैं अपने सभी जाने- अनजाने मित्रों को नब बर्ष २०१० की हार्दिक बधाई देता हूँ।
और एक संबाद दिल से की "मुस्कुराइए की जिन्दगी बहुत-बहुत ही खूबसूरत है।"
अविनाश कुमार
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,
रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,
यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई .......अटल बिहारी वाजपेयी
जिंदगी के फलसफे भी कुछ अजीब होती है, कभी जिंदगी महज एक लम्हा-लम्हा को तरसती है... तो कभी लम्हों के एहसास को समझने में जिन्दगी बीत जाती है।पर ये भी सच है की जिंदगी में मिश्रित भावनाओं के रंग और सम्बेदना कसौटी न हो तो ये बेमानी है।
अनुभवहीनता परिस्थितियों से अक्सर भागने के लिए उसकाती है।ये सच है की परिस्थितियों और परिस्थति बस उत्पन्न अब्सरों को समझना थोरा मुस्किल है पर अब्सरों के लाभ का मूल्यांकन करे तो इनसे संघर्ष ही बेहतर बिकल्प है।
ऐसे ही जिंदगी के कुछ फलसफे लिए मैं अपने सभी जाने- अनजाने मित्रों को नब बर्ष २०१० की हार्दिक बधाई देता हूँ।
और एक संबाद दिल से की "मुस्कुराइए की जिन्दगी बहुत-बहुत ही खूबसूरत है।"
अविनाश कुमार






