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NATURE AND YOGA

HEALTH IS WEALTH

HEALTH WITHOUT MEDICINE BY YOGA AND NATUROPATHY

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THE THEORY OF MODERN SCINCE,PATHOGENE'S ARE WRONG,WHEN WE BECOME SEEK AND THE RESULT OF SICKNESS,THE PATHOGENE'S SEEN AT THE SITE OF INFECTION
SO,OUR PRINCIPAL IS THAT,AFTER THE SICKNESS WE FOUND THESE PATHOGEN'S NOT BEFORE THE FEVER,
IF WE CLAEAN THE BODY PROPERLY WHEN FEVER COME'S
THERE WILL NOT POSSIBILITY OF THE FORMATION OF PATHOGENES

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Comments

MAHESH KUMAR SHARMAayurvedamindia Tuesday, September 6, 2011 3:11:35 PM

Mahesh Kumar Sharma 2:09pm Sep 5

आत्मीय बंधू डाक्टर सा हेब .............................................
...................................................................................
विषय :-येल्लो्.ि चीिकित्सा ,आयुर्वेद व प्राकृतिक चीिकित्सा का योगदान
बंधूवर ,हर चीिकित्सा पधात्ति एक संपूर्ण चीिकित्सा वीञानं नहीं हो सकती,हर चिकित्सा पधात्ति में गुण और दोष दोनों का समावेश होता है,
लड़ाई के मैदान में किसी एक शास्त्र से युध्ह जीता नहीं जासकता,इसी प्रकार से किसी एक चिकित्सा पध्हती का उपयोग कर रोगों पर विजय नहीं पी जासकती
भारतीय चिकित्सा पद्धति का इतिहाश ५००० साल पुराना है,यह भी कहा जासकता है है अनादी है,आज जो हम सोसिअल एंड प्रिवेंतिवे मेदिसिने पद रहे है,वो हमरे धर्मं में संस्कार में सन्निहित है....घर घर में आयुर्वेद>की िचन में विराजमान है...लॉन्ग,एलायेची,आंवला ,,अदरक,मीठा नीम,तुलसी,अज्वैएँ,कलि मिर्च अदि का उपयोग कोण नहीं जनता जो की हमारे नुस नुस में भरा है
हमारे ऋषि महर्षयो की देंन आयुर्वेद का उपयोग ,जीस्स्से हमारे रोगी का कल्याण हो उसे स्वीकार्य कर अपनी म्हां णता का परिचय देना चाहिए
आशा ही नहीं पूर्ण विश्वाश है,अप जैसे नेक दिलो इन्सान आयुर्वेद को भी तार्राकी करने का मोका देंगे,जो की आपकी अपनी धरोहर है
आयुर्वेद में वर्णित>पञ्च कर्म चिकित्सा(पञ्च स्टेप'स),दोषों के निवारणार्थ एक अति महत्व पूर्ण चिकित्सा है,सरीर में संचित दोष(टाक्सिन) जो रोग का मूल कारन होते है,को शारीर से नीकालने से रोग स्वयं दूर हो जाते है,इशे अपनाकर,हम पूर्णतया स्वस्थ रह सकते है
बगेर दवा के सेवन कराये े ,सरीर से तोक्सीन निकलकर बहार करने का यह प्राकृतिक उपाय है,जो रोगी के लिए ही नाही अपितु स्वस्थ्य मनुष्य के लिए भी लाभकारी है,इससे आयु बदती है,रोग प्रतिरोद्ध्क छमता का बदती है,और शारीर से वी कार दूर होते हुई

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