बदला न अपने आप को जो थे वही रहे / निदा फ़ाज़ली
By The Positive Philosopherdrsirswal. Thursday, January 27, 2011 11:33:17 AM
मिलते रहे सभी से मगर अजनबी रहे
दुनिया न जीत पाओ तो हारो न ख़ुद को तुम
थोड़ी बहुत तो ज़हन में नाराज़गी रहे
अपनी तरह सभी को किसी की तलाश थी
हम जिसके भी क़रीब रहे दूर ही रहे
गुज़रो जो बाग़ से तो दुआ माँगते चलो
जिसमें खिले हैं फूल वो डाली हरी रहे
http://niyamak.blogspot.com/2008/04/gajal-by-nida-fazli.html













